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षडाष्टक योग ज्योतिष में बहुत योग होते हैं, जिसमें कुछ योग अच्छे होते हैं कुछ योग बुरे होते हैं, उनमें…

shadastak yog
  • Jai Narayan Sharma
  • Oct 24, 2025

shadastak yog

षडाष्टक योग ज्योतिष में बहुत योग होते हैं, जिसमें कुछ योग अच्छे होते हैं कुछ योग बुरे होते हैं, उनमें से ही एक योग है षडाष्टक योग ।।। षड् यानी 6 , और अष्टक यानी अष्टम ।।। कुंडली में छठा भाव रोग ऋण शत्रु का होता है, अष्टम भाव आयु और मृत्यु का होता है, जब भी कोई ग्रह आपस में 6/8 का कॉन्बिनेशन बनाएं इसे षडाष्टक योग का निर्माण करते हैं ।।। उदाहरण स्वरूप किसी की कुंडली में लग्न में बृहस्पति बैठा हो और छठे भाव में बुध बैठा हो तो बृहस्पति से बुध छठ हुआ और बुध से बृहस्पति अष्टम हुआ यहां पर यहां षडाष्टक योग का निर्माण हुआ ।।। ऐसे ही अगर लग्न में बृहस्पति बैठा हो अष्टम भाव में शुक्र बैठा हो तो यहां षडाष्टक योग का निर्माण हुआ, क्योंकि लग्न में बैठे बृहस्पति से अष्टम भाव में शुक्र है और शुक्र से छठा भाव में बृहस्पति बैठा है ।।। आमतौर पर षडाष्टक योग एक अशुभ योग है, जो नुकसान देता है, रोग ऋण शत्रु पीडा कष्टदायक होता है ।।।। पर ज्योतिष में हर चीज का एक अपवाद भी है, यहां पर यह विपरीत राजयोग का भी काम करता है , षडाष्टक योग अगर अच्छी स्थिति में हो तो प्रतिस्पर्धा में सफलता मिलती है, आयु में वृद्धि होती है ,कर्ज खत्म होते हैं ,तो कुंडली में उपस्थित राज योगी ग्रह के हिसाब से हम षडाष्टक योग के अशुभ/शुभ फल देखते हैं ।।। षडाष्टक योग राशि के हिसाब से भी होते हैं , उदाहरण के तौर पर वृश्चिक लग्न की कुंडली है और बुध की महादशा चल रही है, और शनि की अंतर्दशा चल रही है ।।। बुध अष्टम भाव का स्वामी है और शनि की अंतर्दशा चल रही है शनि तृतीय भाव का स्वामी है, तो बुध की महादशा में शनि की अंतर्दशा वृश्चिक लग्न वालों की चले तो रोग , कर्ज , शोक और चिंता होगी ।।। षडाष्टक योग में दोनों ही ग्रह राज योगी हो तो विपरीत राजयोग कारक हो जाएंगे ।। उदाहरण के तौर पर वृश्चिक लग्न में बृहस्पति लग्न में बैठा हो और सूर्य छठा भाव में बैठा हो तो बृहस्पति की महादशा में सूर्य के अंतर्दशा षडाष्टक योग होने के बावजूद भी अच्छा फल देंगे ।। क्योंकि वृश्चिक लग्न के लिए गुरु और सूर्य दोनों योग कारक ग्रह हैं , ऐसी स्थिति में छठे भाव संबंधित शुभ फल प्राप्त होंगे छठा भाव प्रतियोगिता परीक्षा का है तो संभवतः इस समय जातक को सरकारी नौकरी प्राप्त हो जाए ।।। अब वृश्चिक लग्न की कुंडली हो शनि लग्न में बैठा हो और छठे भाव में बुध बैठा हो और शनि की महादशा में बुध की अंतर्दशा चले या बुध की महादशा में शनि की अंतर्दशा चले ।।। वृश्चिक लग्न के लिए शनि और बुध दोनों ही अकारक ग्रह हैं, और दोनों ग्रह षडाष्टक योग बनाकर बैठे हैं तो ऐसी दशा अंतर्दशा में मृत्यु के कष्ट प्राप्त होंगे ।।। षडाष्टक योग का फलादेश ऐसे समझाया जाए ।।

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